बरसात गिरी और कानों में इतना कह गई ,गर्मी किसी की भी हो हमेशा नहीं रहती…

आईने बेचता था कोई पूछता ना था ,जबसे मुखौटे रख लिए धंधा चमक गया ।।

हदों में रहोगे तो लिहाज देखोगे,हद पार कर ली तो मिजाज देखोगे।

पसंद आईं कुछ भी चीज़ें,ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं हैं…

अफ़सोस इंसानियत को भुला कर इंसानइंसानियत दिखाने का ढोंग बहुत करता है

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