खामखां मैने गहराई पसंद कर ली, कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक ।

"हम उस युग में जन्मेजहाँ युद्ध लड़े गएदेवालय बचाने कोस्त्रियों की देह बचाने को नहीं"

समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये, किसी व्यक्ति विशेष का नहीं….!!

मैं अपने आप को इतना समेट सकता हूँ, कहीं भी कब्र बनाओ मैं लेट सकता हूँ…!!

बहुत मुश्किल से समझ आता है कि ज़िंदगी में, ज़्यादा ज़रूरी ख़ुशी नहीं, "सुकून है

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