बातों बातों में माँ ने फिर पूछा है ,बेटा, क्या छुट्टी बढ़वाई जा सकती है?

ज़मीर अगर जिंदा है तो मेहनत की रोटीगर्व से खा सकते हैं

न तू पूछ मुझसे, न मैं जवाब दूँगा तुझे, तू जानता है सवाल मेरा, मैं जानता हूँ जवाब तेरा…

किस किस से छुपाऊ तुम्हें मैंअब तो तुम मेरी मुस्कुराहट मेंभी नजर आने लगे हो।

चलो हकीक़त से थोड़ी मुलाक़ात  करते हैं ,जितनी औकात बस उतनी  ही बात करते हैं !!

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