मोहब्बत मेरी आख़री शरारत थीफिर यूं हुआ के मैं बचपन से निकल आया….!

कभी अकेला चलना पड़े तो डरिए मत क्योंकिश्मशान, शिखर और सिंहासन पर इंसान अकेला ही होता है…

स्वार्थ मनुष्य के व्यवहार में शामिल होता है , बारिश रुक जाने के बाद छाता भी उसे बोझ लगने लगता है …

सच के लिए संग्राम में इतनी हिम्मत और ज़ज्बा तो होना ही चाहिये !

भीख माँगना भी एक धंधा है। ग़रीब माँगे तो भीख है, नेता माँगें तो चंदा है। शैल चतुर्वेदी

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