अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाएअब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए

कुछ हालातों में ये रास्ते ज़िंदगी केबिल्कुल भी आसान नहीं होते!चलना तो होता है अंगारों परऔर हाथ थके रहते हैं–बर्फ ढोते-ढोते!

बातो की मिठास अंदर का भेद नहीं खोलती, मोर को देखकर कौन कह सकता है ये सांप खाता होगा..!!

जिंदगी एक खेल है और ये आप पर निर्भर करता है , खिलाड़ी बनना है या खिलौना......!!

साथ रहकर जो छल करे, उससे बड़ा शत्रु कोई नहीं होता...

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