इस अंजुमन में हर शख्स मुझसे खफा है,क्योंकि मेरे लबों पर वही है जो मेरे मन में है!

शायरी को आज रहने दो , मुस्कुराहट की बात करते हैं ।।

बचपन में तो यही स्टाइल था

ज़िन्दगी के कुछ लम्हें और हादसे भुलाये नहीं जाते,हालांकि भुला देने में भलायी होती है.लेकिन अफसोस हमसे ये हो नहीं पाता.

तू शरीक रहे मेरे जनाजे में ऐसी सौगात हो,भले तेरी ही बेवफ़ाई के कारण मेरी मौत हो,और दो फूल तुम भी चढ़ाने आना मेरी कब्र पर,मुकम्मल इसी बहाने शायद हमारी मुलाकात हो..!!

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