सुना है तारीफ के पुल के नीचे…मतलब की नदी बहती है…..!!
तुम्हारे जाने के बादज़िंदगी के अलग अलग पड़ाव में..हर जगह…हर एक शख़्स के अंदर…ढूंढा मैंने तुम्हें,
फ़िर एहसास हुआ किछोड़ गये हो तुम…सब जगह थोड़ा थोड़ा ख़ुद को
ढूंढा तुम्हें…पर दोबारा कभी तुम मुझे पूरे ना मिले।
तुम्हारें जाने के बाद की बारिशें ,
मुझे अब तेजाब सी लगती है ..!!
✯||तारीफो में कमी नहीं होगी जानतुमने शायर को पटाया हैं किसी छपरीको नहीं…||✯
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुझे भूल गए हैं हम.