वफ़ा की उम्मीद एक बेवफ़ा से लगाई है, मैने अपनी अर्थी अपने ही हाथों से सजाई है

हर किसी के लिए, बारिश का मौसम सुहाना नही होता। जाकर पूछो उनसे, जिनका फुटपाथ के सिवा कोई ठिकाना नहीं होता।।

कहता है, वो महफूज रहे वो घर के बंद दीवारों में, बता...द्रौपदी कहा लूटी थी, घर मे या बाजारों में...!!

बेचैनियों के दौर में....सकूं की दवा हो तुम....!!

क़ासिद दयारे यार से लाए हो कुछ ख़बर । ईद तो दहलीज़ पर है वो आए क्यू नही ।

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