नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।

जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते, अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।

क्रोध शरीर को जलाता है और पश्चाताप आत्मा को

काश  तेरी जुदाई की कोई सरहद होती,  पता तो रहता अभी कितना सफर और तय करना है

जुबानों के पीछे मत चलो, कोई तुम्हे ऐसी कहानी नहीं बताएगा, जिसमे वो खुद गद्दार हो।।

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