हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते !

फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया,ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं !

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगेजो हो परदेस में वो किससे रजाई मांगे !

बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने परजो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ !

राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलेंरास्ते आवाज देते हैं सफर जारी रखो !

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