ढलती उम्र के साथमोहब्बत बढ़ती जाएबस तुम्हारा इतना साथ चाहिए। -नेहा यादव

प्रीत के पंछी हो,तड़पने से डरते हो?जब बारिश में निकले हो ,तो भीगने से क्यों डरते हो? _अर्चना शर्मा

आज फिर से ओढ़ ली उसनेख़ामोशी की चादरज़बान उसकी मगर चीखना चाहती थी

मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखें , जिंदगी कभी ना मुस्कुराई फिर बचपन की तरह ।।

आंखों के समॅंदर में तूफ़ान का आग़ाज़ हैं ,अब कोई अपनी कस्तियां संभालें भी तो कैसे..!!

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