**एक इश्क़-बाजाँ,बे-हिसाब दर्द दे गयाबे-रहम क़त्ल करदिल-ख़ूनी कर गया।। अंकिता

आ ज़ा फिर से मेरे ख्यालों में….कुछ बात करते हैं… कल जहाँ खत्म हुई थी…वहीं से शुरुवात करते है…

एक तुम गये केपूरा काफिला गयातूफा था तेजपेड़ को जड़ से हिला गया …. जब सल्तनत से दिल काही राजा चला गयाफिर क्या मलाल तख्तगया या किला गया….

तकदीरो में नही था मेरे वो शख्सजो मेरे हाथो से अपने हाथो की लकीरें मिलता था

ज़िन्दगी भर मेरे जीते जी तुमने मेरा मातम मनाया, आख़िरी तमन्ना है मेरी मौत पर तुम उत्सव मनाना…!!

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