रोज इक ताजा शेर कहाँ तक लिखूं तेरे लिए, तुझमें तो रोज ही एक नई बात हुआ करती है !!

सुना है, घर के कई टुकड़े हो गए।अच्छा! अच्छा! ,बच्चे बड़े हो गए।।

पुस्तकालय एक ऐसा वृक्ष है, जहाँ विचारों के फल हर मौसम में लगते हैं ।

मृत्यु और मिथ्या से मिश्रित जग में , प्रेम सदैव शाश्वत है...

समझ नही पा रहा हूं की आखिर क्या गलत,चल रहा में मेरा स्वभाव या फिर मेरा वक्त..!!

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