जब बच्चे ने काग़ज़ खाया तो माँ ने डाँटा, बच्चे ने रो कर कहा माँ काग़ज़ पर रोटी बनी थी।

उसके छूने भर से ही मेरी सांसें, जाने क्यों तेज़ी से चलने लगती हैं

खामखां क्यों किसी को दोष दे रहे हो, तुम्हारी हर तकलीफ़ के तुम स्वयं जिम्मेदार हो....!!

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मसला ये नहीं की लोग परवाह क्यों नहीं करते, मुद्दा ये है की हम उम्मीद क्यों करते हैं...

कभी-कभी कुछ लोग अपने बोले हुए अल्फाजों की वजह से, हमेशा के लिए दिल से उतर जाते हैं।

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