ख़ुदकुशी को टालकर आया हूँ मैं, हाँ बताओ! क्या ज़रूरी बात है ?

संघर्षों की समर भूमि में, हमसे पूछो हम कैसे हैं, कालचक्र के चक्रव्यूह में, हम भी अभिमन्यु जैसे हैं। हरिओम पंवार

दोस्ती बड़े लोगो से नहीं ,मुसीबत में साथ देने वाले लोगो से होनी चाहिए…

इश्क की सुई से जहर रगो में उतारा गया हैमें भी हसमुख था मुझे जहरीला बनया गया है

पानी अगर शांत हो तो,गहराई से मज़ाक नहीं करते….

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