की गैर तो गैर है गैरों से गिला क्या.. अपने तो अपने हैं अपनों से मिला क्या..!!

पहाड़ तोड़ने का साहस तो हर इंसान में है, पर वो डरता है "कामयाबी" के पहले पागल घोषित किए जाने से।

मेरी चीखों कि खामोशियां बड़ी जालिम हैं, धड़कन रोक कर उतारती हैं आंसू हलक में..!!

मैं बिल्कुल शीशे जैसा हु जो जितना मेरा है मैं उसका उतना हु.

चले आओ अजनबी बनकर फिर से मिले.. तुम मेरा नाम पूछो मैं तुम्हारा हाल पूछूँ..!!

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