है एक कर्ज जो हरदम सवार रहता है , वो माँ का प्यार है सबपे उधार रहता है।।

जिन पेड़ो ने पतझड़ सहे हैं, बसंत भी उन्हीं पेड़ो पर आता है....

बस दिल करता है ,कोई समझ ले ,संभाल ले ,समेट ले ...

मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँ रात भर नहीं आती

रहता नहीं कोई भी मंज़र सदा यहां हर ताल्लुक मुसाफिराना है !

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