जैसा तुम सोचते हो ना वैसे तो हम हैं नहीं और जैसे हम हैं ना वैसा सोचने की तुम्हारी औकात नहीं है..!

हर रात जान बूझकर रखता हूँ दरवाज़ा खुला , शायद कोई लुटेरा मेरा गम भी लूट ले...

तीर मोहब्बत की घाव कर गयी, चीरकर मेरा दिल मुझ पर वार गयी, मैं आस लगाए बैठा था उससे चंद मुलाकातों की, आज यादें उसकी मेरी रातें खराब कर गयी..!!

हजारों कमियां होगीं मुझे में पर औरों सा डबल रोल में तो नहीं हूं ना...!!

गिरवी होते तो ख़रीद लेते, अब गिरे हुए लोगों की कीमत कौन लगाता है....

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