जिस शहर से कुंवारों को, मयस्सर न हो दुल्हन... लाज़िम है कि उस शहर के मैरिज हाल गिरा दो.!

यह तन विष की बेलरी, गुरू अमृत की खान। कबीरदास

अपने संघर्ष को अपना जुनून बना लो.. जब तक वो तुम्हारी कहानी ना लिख दे..!!

मसअला ये नहीं कि! तुम दूर हो गये हो, मुद्दा बस इतना है कि वो तरीका ग़लत था

जो नज़र से उतरते हैं वो दिल से भी उतर ही जाते ही हैं..!!

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