भावनाओं का कोई पार्थिव शरीर नहीं, होता उनका बस अंतिम संस्कार होता है.... सनकी

मेरे रोने कि तू परवाह ना कर, अब हालातों से लड़ लेता हूं, तब अश्कों से थे खून बहे, अब खामोशी से रो लेता हूं..!! विरक्ति

मेरी "भक्ति" का कुछ ऐसा "असर" हो जाए, मैं बोलूं जय "श्रीराम" और "हनुमान" प्रकट हो जाएं..!! विरक्ति

जब प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो निंदा का टैक्स तो चुकाना ही पड़ेगा... निंदा से ना घबराएँ ये तो प्रगति की निशानी है...

पीने का अंत बर्बादी ही है, चढ़ गई तो आदमी बर्बाद, और न चढ़ी तो पैसे।

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