छल करोगे तो छल मिलेगा!! आज नहीं तो कल मिलेगा!! जिओगे जिंदगी सच्चाई से तो सुकून हर पल मिलेगा..!!

समझो जग को न निरा सपना पथ आप प्रशस्त करो अपना मैथिलीशरण गुप्त

मुझे जब भी उसकी याद आती है, मुझे सुलाने में सारी रात हार जाती है!!

शेरों के साथ संगत बनाइए.. कुत्तों के साथ बैठने से आप सिर्फ पीठ पीछे भोकना ही सीखेंगे..!!

ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में मनुज नहीं लाया है, अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।" रामधारी सिंह 'दिनकर'

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