बाप की आँखों से गिरने वाला एक आंसू आपको तमाम उम्र रुला सकता है

उनसे कहो कि वो चाय के वक्त पर हमें बुला ले लेना. हमें ऐ रोज़-रोज़ का अच्छा नहीं लगता चाय बनाना... मालती

उनकी गलतियों पर पर्दा डाल दिया मैंने उसको दिल से निकाल दिया

जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है रामधारी सिंह दिनकर

मूर्ख से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है, मच्छर मरे या ना मरे पर आपको थप्पड़ ज़रूर लगेगा।

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