ज़हर की ज़रूरत ही ना पड़ी ... उसके हर पल बदलते बर्ताव ने ही हमें मा^र डाला

जितना आपके लहज़े में सब्र होगा उतना ही आपकी दुआओं में असर होगा...!

याद रखना, ढलते वक्त में हाथ छोड़ा है, हिसाब तो जरूर किया जाएगा ।

चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें, दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का...

हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्तबस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह

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