त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए...

जितना ज्यादा तुम उसे बाहर ढूंढते हो, उतना ज्यादा ही वो तुम्हारे अंदर होता हैं पढ़ लो चाहे दुनियां का कोई भी ग्रंथ, इश्क़ और ईश्वर हमेशा ऐसे ही तो मिलता हैं!

पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !

बहते पानी की तरह रहोगेतो कचरा ख़ुद किनारे हो जाएगा !

आगे सिर्फ अंधेरा है,इसलिए इस बार अपना वोट सोच समझ कर दें !

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