हर बार मेरे सब्र को तुम कुछ इस तरह आंकती हो, मचल के रह जाता है दिल जब तुम दहलीज़ से झांकती हो..!! विरक्ति

बड़े ही खुशनुमा वहम थे , की हम उनकी जिंदगी में अहम थे ..!!

यह जादू तो है मेरे पास कि मैं तकलीफ़ को कविता में बदल देता हूँ, और सौभाग्य को ख़ाक में। देवी प्रसाद मिश्र

उबलते वक्त पानी भी सोचता है, अगर बर्तन ना होता तो आग को बताता !!!

चाय से दोस्ती कल थी, आज है और कल भी रहेगी... फिर चाहे मौसम बदले या ज़माना !

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