अंत सभी का समान है, हम जीते जी क्या करते हैं, बस वही हमें अलग बनाता है

यादें दस्तक देती हैं आँखें नम हो जाती हैं होठ खामोश रह जाते हैं दिल की धड़कनें शोर बहुत मचाती हैं मधुलिका

किसी की निंदा करने से, यह पता चलता हैं की , आपका चरित्र कैसा हैं न कि उस व्यक्ति का आचरण ...

हालात इंसान को वो बना देते हैं, जो वो कभी था ही नहीं....

मिलो कभी फुर्सत निकाल कर, एक दिन बहुत उलझना है मुझे तुम से !

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