वही ज़िद वही हसरत, ना दर्द-ए-दिल की कमी हुई अजीब है मोहब्बत मेरी, ना मिल सकी ना ख़त्म हुई

कामयाबी का तभी "सिंहासन" होगा, जब आपका अपने "मन" पर शासन होगा। सेजल

मुझसे जो तुम मेरा हाल पूछते हो, बहुत मुश्किल सवाल पूछते हो....

क्यों अपना दर्द महफ़िल में सुनाया जाए चलो मुस्कुरा कर सबका दिन बनाया जाए आभा

तुम्हारे अंदर जितना दर्द हैं, बेशक उतना ही इश्क़ भी रहा होगा !

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