जिंदगी एक रंगीन लिफाफे में लिपटी, एक उदास चिट्ठी है!! अनवर चतुर्वेदी

बेवफा लोग बड़ रहे है धीरे धीरे एक शहर अब इनका भी होना चाहिए..!!

अपने लिए तो सभी जीते हैं, दूसरों के लिए जीना ही असली जिंदगी है।।

सब झूठे हैं यहां, बस यही एक सच है..!

दरारें अपनों में, इस कदर ना बढने देना, कि गैरों की जरुरत पड़े, मरम्मत के लिए....

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