बाप गरीब जरूर है लेकिन इस बेटी के लिए , एक राजा की तरह सभी ख्वाइशें पूरी करता है ।।

मज़दूर स्त्रियों के साथ अपने खेत में धान की रोपनी की..! नेहा सिंह राठौर

जो चराग़ों को बुझाने की हिमाक़त करते हैं ज़िंदगी-भर उन के हिस्से रौशनी आती नहीं राघवेंद्र द्विवेदी

पैसों से सिर्फ पेट भरता है , दिल आज भी भावनाओं का ही मोहताज है

स्वार्थ की बदबू मारने वाले मतलबी लोग….. मतलब होने पर चंदन सी सुग़न्धित बातें करते है !!!

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