वास्ता पड़ता है तो नस्लो का पता चलता हैं, बातों से तो हर कोई खानदानी लगता हैं...

अजब सी खामोशी हैं मेरे अंदर तेरे जाने के बाद.... मै चीखती हु, चिल्लाती हु मगर शोर नहीं होता!!

किरदार बह गया पानी में... हम तैरते ही रह गए कहानी में..!!

मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है। मुंशी प्रेमचंद

अच्छे कपड़ों में कुछ स्वाभिमान का अनुभव होता है। मुंशी प्रेमचंद

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