लोग इंतजार में थे मुझे टूटा हुआ देखने को, एक मैं था जो सहते सहते पत्थर का हो गया।

हैरत इसपर नहीं कि धर्म का धंधा हो रहा है , हैरत इसपर है पढ़ा लिखा भी अंधा हो रहा है !

लड़े जो अंदर से बिखरकर ,कड़वी बात सुनकर डटे रहना। मौन होकर ही सही, पर मित्र के साथ हर पल खड़े रहना।। सेजल

इंतज़ार मत करो जो कहना हो कह डालो क्योंकि हो सकता है फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाए। केदारनाथ सिंह

आप कोई वादा करते हैं तब आप आशा को जन्म देते हैं और जब आप वादे को निभाते हैं तब आप विश्वास को जन्म देते हैं !!!

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