कोई भी नशा आदमी के लालच से बड़ा नहीं होता! मदन कश्यप

अभी माचिस है तेरे हाथ में , तू जितने चाहे घर जला ! पर हवा के मिज़ाज से खौफ़ खा , कहीं तेरा घर भी न दे जला !!

रंग बदलती इस दुनिया में... मुझे अपने बेरंग होने से...शिकायत न रही....

हमारा खुद का एक रुतबा है, आप कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता

वो लौट कर आई है मनाने को... शायद आजमा कर आई है जमाने को..!!

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