जिम्मेदारियाँ जब सर पर हों, तो जिन्दगी के दलदल भी कदमो को बढ़ने से रोक नहीं पाते । ~ प्रह्लाद पाठक

लड़की का बाप लडके मे पचीस की उम्र में वो सब खोजता है, जिसको हासिल करने में उसे भी खुद पचास साल लग गए।

ढल चुका है सूरज चांदनी भी खो रही है, मेरे साथ तेरी याद में, ये रात भी रो रही है..!! विरक्ति

रफ्फू ना कर इसे ए दर्जी खुदा के लिए की दिल के सुराख से हवा खुश ग्वार आती है

नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो। मैथिलीशरण गुप्त

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