सुनो,, तुम कबूल तो करो इश्क मेरा,, मैं खाना बनाना भी सीख लूंगी।।

तर्क किये बिना किसी भी बात को आँख मूंदकर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है भगत सिंह

अज्ञानी व्यक्ति एक बैल के समान है, वह ज्ञान में नहीं बल्कि आकार में बढ़ता है गौतम बुद्ध

मसला हल हुआ? हुआ कि नही? हमसा कोई मिला? मिला कि नही? छोड़िये हमको हम तो बे-दिल है। आपका दिल लगा? लगा कि नही?

विद्वत्ता अच्छे दिनों में आभूषण, विपत्ति में सहायक, और बुढ़ापे में संचित धन है।

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