गर शौक़ ज़िन्दा हैं , तो दिल आज़ाद परिंदा है..!!

मेरे गाँव का मौसम बसंत हो गया है,यानी, तुम शहर से गाँव आई हो।

हमारे खून से पाई है तुमने आजादी, हमीं से पूछते हो तुम हमारा हक़ क्या हैं...

किसी ने कहा तुम बहुत अच्छे हो मैंने कहा यही तो बस खराबी है..

जो गरीबों का था बेटा, वो कफ़न में आ गया, और जो खूनी था वो झट से सदन में आ गया। मयंक 'नारी'

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