दोबारा लौट कर शायद मेरा बचपन चला आएअगर पापा ख़्वाब में आ जाए तो नादान हो जाऊँ

कभी मुख़लिस तो कभी मुनाफ़िक़ हैं ये मतलब परस्त लोग माहौल के मुताबिक़ हैं !

नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।

सज गई मंडी वोटो की आ गए उनके चाहतदार...हाथ जोड़कर मांग रहे हैंबन जाओ उनके खेवन हार...🙏🥸निर्णय लेना सोच समझकर नानी दादी दादा और पापा महिला बहने भी याद रखना तुम्हारी बचत पर फिर से ना पड़ जाए छापा....!!😜

होंगे दक्षिण, होंगे वामजनता को रोटी से काम

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