दूसरो को वीरान करने वाले, कभी आबाद नही हुआ करते...

मनुष्य अधिक चतुर बनकर अपने को अभागा बना लेता है। जयशंकर प्रसाद

उम्मीद पर ज़ीना , जीने की आखिरी उम्मीद है..!!

त्याग वहीं करें जहां उसकी जरूरत हो, दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं खुद का वजूद कम होता है !

मोहब्बत की उम्र में जिंदगी, संघर्षो मे उलझी है। किताबों के बीच गुलाब नही, आज भी 'कलम' रखी है।।

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