वर्तमान में स्त्री का एक हिस्सा , उसके बहोत से हिस्सो पर भारी पड़ रहा है ।

ना दोस्त है कोई मेरा ना ही अब कोई रहबर है, मेरी ज़िन्दगी में मोहब्बत का होना ही ज़हर है..!! विरक्ति

चार दिन बाज के ना उड़ने से आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!

अपनी तन्हाई का वजूद हूँ मैं, कुछ न होने के बावजूद हूँ मैं !

जब वक्त बुरा हो तो ‘मेहनत’ करना जब वक्त अच्छा हो तो ‘मदद’ करना

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