आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं! — मोहम्मद अल्वी

तुम्हारी ख़ातिर तो बदला मैंने खुद को। फिर तुम....किसकी ख़ातिर बदल गए

मैं इसलिए ज़िंदा हूँ कि मैं बोल रहा हूँ दुनिया किसी गूँगे की कहानी नहीं लिखती अनवर जलालपुरी

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है ... राहत इंदौरी

गरीबी पर शायरी लिखने बैठा था , कमबख्त कलम ही रो पडी।।

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