लोग बेताब थे मिलने को मंदिर के पूजारी से, हम दुआ लेकर आ गये बाहर बैठे भिखारी से..!

नफरत आसान है, कोई भी कायर नफरत फैला सकता है दयालु होने के लिए साहस की आवश्यकता होती है

आज की पीढ़ी को.. ईमानदार बाप निकम्मा लगता है..!!

फिर यूँ हुआ कि वक़्त ने मसरूफ़ कर दिया , वरना हमारे पास ज़माने के ख़्वाब थे ।।

ना मैं किसी की, ना कोई मेरा .. इस गुजरती रात का, मैं हूं आने वाला सवेरा !

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