अंत का भी अंत होता है कुछ भी कहां अनंत होता है पतझड भी एक घटना है बारह महीने कहां बसंत होता है

मुझे समझ पाना इतना आसान नहीं... गहरा समंदर हूं , खुला आसमान नहीं...!!

सोच रहा हूँ बंद करदु ये शाएरी का सफर बस तेरी लाल लिपिस्टिक पर पूरी ग़ज़ल लिखदूँ...

काली साड़ी, लाल लिपिस्टिक, खुले बाल एक पुरुष की तपस्या भंग करने के लिए पर्याप्त हैं...

किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं।

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