तुम्हारी नामर्दानगी बुजदिली, एक दिन इस देश की तबाही का कारण बनेगी।

इस आजाद भारत के आजाद लोगों ने इतनी आज़ादी पायी है, कि सरेआम किसी स्त्री को निर्वस्त्र कर उसकी दौड़ करवाई है..!!

सिलवटें उतर गई थी चेहरे कि, खुशियों के इंतज़ार में, मगर मुफलिसी अपनी ऐंठ में, दस्तक लगाए बैठी रही..!!

नौकरी नौजवानों के जीवन का वह श्रृंगार है, जिसके बिना समाज का कोई भी अंग उन्हें सम्मान की दृष्टि से नहीं देखता है।

हर दौर में जुल्म रहा हैं, और हर दौर में ज़ालिम मिटा हैं।

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