काश हमारे प्यार की नैया भी कबूतर पार लगाता,
तुम्हारा पैगाम अपने पैरो से मुझ तक पहुंचाता,
ख्वाब सात जन्मो के हम भी देख लेते तुम्हारे साथ,
अगर मुकद्दर को होता मंजूर तो तुमसे मिलवाता,
और हम भी महका देते कमरे को गुलाब के...
ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”
वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है !!
जाति सिर्फ दो ही है, स्त्री और पुरुष,
धर्म सिर्फ एक है इंसानियत बाकी सब पाखंड और धंधा है...
हम नास्तिक लोग इस धरती को स्वर्ग बनाना चाहते हैं,
और आस्तिक मूर्ख लोग काल्पनिक स्वर्ग के चक्कर में,
इस धरती को नर्क बना रहे हैं।।
बाजार से खरीदी हुई मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर धन मांगते हो,
अगर मूर्ति धन देती तो दुकानदार इसे बेचता ही क्यों ??