जो जितना तुम्हारा है तुम भी उसके उतने ही रहो ज्यादा दिल की गुलामी में इज्जत की नीलामी हो जाती है

वो सिर्फ़ मेरे थे, सिर्फ मेरे सामने....

किस चीज़ का बनवाती हो लिबास तुम अपना , कपड़ा तो इस आग को छूकर जल जाता होगा..!

मेरे कानों का वो झुमका हमारे इश्क़ की छन छन पेइतराता हैतेरे हाथों की छुअन सेजाने क्यूँ अब भी शर्माता है

जीवन कि सभी यातनाओं से अब मुक्ति कि सौगात चाहिए, सो जाऊं सुकून कि नींद तेरी गोद में ऐसी हसीन मौत चाहिए..!! विरक्ति

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