दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है केवल उतना ही याद रखती है, जितने से उसका स्वार्थ सधता है। हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

बड़ा नौकर बनने से अच्छा हैं, एक छोटा सा मालिक बना...

नरम दिल से पत्थर दिल होने के सफर को इश्क कहते है

वो मिली मुझे लेकिन छोड़ने के लिए!

हसरते दफन है खुद की खुद में क्या इंसान कब्रिस्तान नही है

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