नेता गरीबों कि बैसाखी के सहारे खुद के सिर पर ताज चाहते हैं, कहलाते गरीबों के मसीहा हैं और उन्हीं को पैरों तले दबाते हैं..!! विरक्ति

सही वक्त पर करवा देंगे हदों का एहसास, कुछ तालाब खुद के समंदर समझ बैठे हैं...

लगता है मेरे अच्छे दिन रास्ता भटक गए हैं.. पता नहीं क्यों आ ही नहीं रहें...!!

अजीब होती है इंसान की फितरत निशानियों को महफूज़ रखकर इंसान को खो देते हैं।

मर चुका है दिल मगर जिंदा हूं मैं जहर जैसी कुछ दवाएं चाहिए 💔

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