लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं

ग़म और ख़ुशी में फ़र्क ना महसूस हो जहां मैं दिल को उस मकाम पे लाता चला गया साहिर लुधियानवी

किसी को उतनी ही तकलीफ देना.. जितनी बाद में खुद बर्दाश्त कर सको..!!

किसी के दर्द का बैंडेज ना बनो क्योंकि जब, घाव भर जायेगा तो कूड़े में फेंक दिए जाओगे...

"पड़ते जिस ओर चरण मेरे भूगोल उधर दब जाता है।" दिनकर जी

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