"माँ थी अनपढ़ लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी कई बार नये गीत भी सुनाती रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि" आलोक धनवा

कर्म अगर अच्छा है तेरा क़िस्मत तेरी दासी है दिल है तेरा साफ़ तो प्यारे घर में मथुरा काशी है! गोपालदास नीरज

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते अटल बिहारी वाजपेयी

जिंदगी में सिर्फ पहली बार, इतना ही कहा है मैंने बहुत मजबूत रिश्ते थे, बहुत कमजोर लोगों से...!

कुछ ग़म और कई उलझनें है जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.

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