हमसे दिखावा नहीं होता, हम आईना है हमसे ये फरेब नहीं होता।

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो दुष्यंत कुमार

कभी किसी हंसते हुए चेहरे को पढ़कर देखना, आँसुओं की उनमें अनगिनत कहानियां मिलेंगी....!!

चालाकियों से कुछ देर ही मोहित किया जा सकता है , दिल जीतने के लिए सरल और सहज होना ज़रूरी है ...

किसी को उजाड़ कर बसें तो क्या बसें, किसी को रुलाकर हसे तो क्या हसे।

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