किसी जगह पर पहुँचने के लिए, किसी जगह से निकलना भी पड़ता हैं...

जिसके लिए टूटो वह तुम्हें कभी संँभालने नहीं आता

ना बाप का साया, ना रिश्तेदार और ना ही कोई रहबर है, सर पर कई जिम्मेदारियां ऊपर से मुफलिसी का कहर है..!!

मुनासिब समझो तो मुझे अपनी आंखों पर होंठ रखने दो ये डार्क सर्कल सिर्फ खीरे से ठीक नही होंगें

मोहब्बत सिर्फ धोखा है ये तब समझ आया था, जब एकांतवास ने मुझे अपना कैदी बनाया था..!!

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